Friday, January 29, 2016

International School Standard

अंतरराष्ट्रीय मानक पर खरा उतर रहा जी-3 स्कूल
-तीसरी कक्षा से ही बच्चों को दिया जा रहा प्रतियोगिता का माहौल
-प्रबंध समिति में तकनीकी जानकारों की मदद से मिल रहा बच्चों को विशेष लाभ
-बच्चों का दाखिला स्कूल में करवाने के लिए अभिभावकों में मची होड़
सोनीपत,
ज्ञान गंगा ग्लोबल स्कूल (जी-3) ने अपने कैंपस में मौजूद आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं व गुणवत्ता युक्त शैक्षिक व्यवस्था की बदौलत अंतरराष्ट्रीय मानक पर खरा उतर रहा है। नए शैक्षणिक सत्र में अपने बच्चों का दाखिला इस स्कूल में करवाने के लिए अभिभावकों में होड़ सी मची हुई है।
दरअसल शहर में अंतरराष्ट्रीय मानक पर बिल्कुल खरा उतरने वाले स्कूल की कमी पिछले एक दशक से महसूस की जा रही थी। कागजों पर तो कई विद्यालय अपने यहां आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा कर रहे थे, लेकिन उसके बावजूद अभिभावकों को कुछ कमी महसूस हो रही थी। लेकिन पिछले तीन वर्षों में जी-3 स्कूल ने एक नया मुकाम हासिल किया है। बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया करवा कर उनके अभिभावकों की विश्वास को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

 मैनेजमेंट का है ग्लोबल विजन
जी-3 स्कूल के मैनेजमेंट में शामिल महानुभावों का विजन ग्लोबल हैं। कई सदस्य तकनीकी बैकग्राउंड से हैं। आईआईटी,  आईआईआईटी व आईआईएम जैसे संस्थानों में पढ़े मैनेजमेंट के सदस्य मानते हैं कि इंजीनियरिंग व मेडिकल के टाप कालेजों में दाखिला लेने के लिए बच्चों को शुरू से ही तैयारी करनी होगी। तभी जाकर बच्चे बारहवीं पास करने के बाद आईआईटी,  आईआईआईटी, एम्स की प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं। स्कूल ने इसी सोच के तहत तीसरी कक्षा से ही एक अनोखा प्रतियोगी मेडल तैयार किया है। इसके तहत बच्चों को मैथ व साइंस ओलंपियाड की तैयारी करवाई जा रही है। स्कूल स्तर पर नियमित रूप से बच्चों की टैलेंट सर्च परीक्षाएं ली जा रही है, जिससे उनके अंदर जुनून पैदा हो सके। यह पूरी प्रक्रिया  मैनेजमेंट के तकनीकी दक्षता वाले सदस्यों के मार्गदर्शन में लगातार जारी है। अभिभावकों ने भी स्कूल के इस प्रयास को सराहा है।

शिक्षकों को भी दी जाती है विशेष ट्रेनिंग
स्कूल प्रबंधन ने अपने विजन के तहत शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दे रही है, जिससे कि वे मैनेजमेंट की सोच को अमल में ला सकें। सीबीएसई का सिलेबस पूरा करने के साथ ही बच्चों में प्रतियोगिता की भावना का विकास करने के लिए शिक्षकों का मोटीवेशन भी आवश्यक है। विशेष ट्रेनिंग की बदौलत ही स्कूल की टीचर बच्चों को मैथ व साइंस ओलंपियाड की तैयारी करवाने में सक्षम हो रही हैं।

इंगलिश कम्यूनिकेशन पर है विशेष जोर
अमूमन सोनीपत जिले के बच्चे प्रतिभाशाली होने के बावजूद इंगलिश में कमजोर होने के कारण प्रतियोगिता परीक्षा में पिछड़ जाते हैं। निजी स्तर पर करवाए गए एक सर्वेक्षण में यही बात सामने आई है। इन बातों पर भी स्कूल मैनेजमेंट की विशेष नजर है। स्कूल के चेयरमैन सुधीर जैन कहते हैं कि बच्चों का स्पोकेन इंगलिश मजबूत होना आवश्यक है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, साथ ही उनके व्यक्तित्व में भी निखार आता है। स्कूल कैंपस में कम्यूनिकेशन का माध्यम इंगलिश है। खास तौर पर उन बच्चों की जिनकी इंगलिश कमजोर है उनके लिए एक अलग माडल अपना कर उन्हें अंग्रेजी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पिछले तीन वर्षों में उनके प्रयासों को काफी सफलता मिली है। अभिभावक भी अब उनकी बातों व भावनाओं को समझने लगे हैं। इससे स्कूल के विकास को बढ़ावा मिला है।


क्या कहते हैं स्कूल के सीइओ
जी-3 स्कूल के सीइओ व आईटी विशेषज्ञ संजय जैन कहते हैं कि मैनेजमेंट ग्लोबल विजन के तहत ही शिक्षा के क्षेत्र में आगे आई है। वे स्वयं आईटी इंडस्ट्री को छोड़ कर स्कूल में बच्चों की डेवलपमेंट पर नजर रख रहे हैं। आईटी विशेषज्ञ के रूप में अपने अनुभव को देखते हुए वे मानते हैं कि स्कूल स्तर से ही बच्चों का चहुंमुखी विकास होना बेहद आवश्यक हैं। इसी विजन के कारण बच्चों को स्कूल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि विद्यालय से बारहवीं पास करने के बाद उनके विद्यार्थी आईआईटी, आईआईआईटी, एम्स जैसी प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं में भी सफलता पाने में पूरी तरह से सक्षम होंगे।

Technology

टेक्नालाजी के प्रयोग में सबसे आगे जी-3 स्कूल 
-जिले में सबसे पहले स्कूल की कक्षाओं में शुरू हुआ टैबलेट का प्रयोग  
-स्मार्ट क्लास में हो रहा स्मार्ट तरीके से कार्य 
सोनीपत , 
ज्ञान गंगा ग्लोबल स्कूल (जी-3) ने स्कूली शिक्षा में टेक्नालाजी का प्रयोग नए तरीके से करके दिल्ली-एनसीआर में एक नया मुकाम हासिल किया है। जिले में पहली बार जी-3 स्कूल की कक्षाओं में ही व्यापक रूप से टैबलेट का प्रयोग शुरू किया गया है। वाई-फाई व सीसीटीवी लगे स्कूल कैंपस में स्मार्ट क्लासों का प्रयोग भी टीचर स्मार्ट तरीके से कर रही है, ताकि बच्चों को इसका भरपूर फायदा मिल सके। अभिभावकों ने भी स्कूल के इस कदम की सराहना की है। यही कारण है कि आज जिले में यह स्कूल बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों के बीच काफी लोकप्रिय रूप में सामने आया है। नए अभिभावक भी बच्चों का दाखिला इस स्कूल में करवाने के लिए काफी उत्सुक हैं। 

टेक्नालाजी का प्रयोग आज समय की मांग 
सूचना क्रांति के इस दौर में स्कूली स्तर से ही टेक्नालाजी का प्रयोग एक अनिवार्यता बन चुकी है। जी-3 स्कूल के मैनेजमेंट ने इस बात को बखूबी समझा है। इसी का परिणाम है कि जिले में पहली बार कक्षाओं में टैबलेट का प्रयोग इसी स्कूल में शुरू हुआ है। आज इस स्कूल की टीचर व बच्चे पूरी कुशलता के साथ अपनी कक्षाओं में टैबलेट का प्रयोग कर लाभान्वित हो रहे हैं।  

टैबलेट से तेजी से बढ़ रही बच्चों की जानकारी 
स्कूल की कक्षाओं में टैबलेट के प्रयोग के कारण बच्चों की जानकारी में तेजी से इजाफा हो रहा है। बच्चे मैथ व साइंस जैसे विषय को इसके कारण आसानी से समझ रहे हैं। विभिन्न विषयों के विजुअल्स को देखकर बच्चे विषयवस्तु को आसानी से समझ रहे हैं। टैबलेट के प्रयोग की वजह से उन्हें किताबों के भारी-भरकम बोझ से भी उन्हें राहत मिली है। शायद यही कारण हैं अभिभावकों ने भी बच्चों के लिए टैबलेट खरीदने में काफी उत्साह दिखाया है। टैबलेट के सुरक्षित प्रयोग को लेकर शिक्षकों ने भी अभिभावकों को काफी जागरूक किया है। 
स्मार्ट क्लासों का हो रहा स्मार्ट तरीके से प्रयोग 
आजकल स्कूलों के प्रचार-प्रसार के लिए  स्मार्ट क्लासों का काफी प्रयोग हो रहा है। लेकिन जी-3 स्कूल दिल्ली-एनसीआर के उन चुनिंदा स्कूलों में शुमार है, जहां स्मार्ट क्लासों का स्मार्ट तरीके से प्रयोग हो रहा है। स्कूल के निदेशक अंकित जैन कहते हैं कि मैनेजमेंट के पास आन रिकार्ड इस बात का पूरा लेखा जोखा उपलब्ध होता है कि अमुक टीचर ने सप्ताह में कितने घंटे स्मार्ट क्लास का प्रयोग टीचिंग के दौरान किया है। 

टीचरों को दी जाती है स्मार्ट ट्रेनिंग 
स्कूल में शत प्रतिशत टीचर कंप्यूटर का प्रयोग करने में सक्षम है। टीचरों की नियुक्ति के बाद उन्हें मैनेजमेंट में मौजूद आईटी विशेषज्ञ एक खास शेड्यूल के तहत उन्हेंं स्मार्ट क्लास व टैबलेट का प्रयोग करने संबंधी ट्रेनिंग देते हैं। जिससे टीचर आसानी से बच्चों को पढ़ाने में सक्षम हो जाते हैं। इतना ही नहीं टीचर ई-मेल के माध्यम से भी बच्चों के अभिभावकों से संपर्क में बने रहते हैं।

क्या कहते हैं स्कूल के सीइओ 
जी-3 स्कूल के सीइओ व आईटी विशेषज्ञ संजय जैन मानते हैं कि स्कूली शिक्षा में 

टेक्नालाजी का सफल प्रयोग आसान नहीं था। लेकिन टीचरों की कड़ी मेहनत व अभिभावकों की जागरूकता से उनका मनोबल भी बढ़ा है। टैबलेट के प्रयोग को लेकर अभिभावक काफी असमंजस में थे। लेकिन मैनेजमेंट की सकारात्मक सोच व भावनाओं पर भरोसा जता कर अभिभावकों ने उनका काम आसान कर दिया। आज अभिभावक इस बात को लेकर खुशी का इजहार करते हें कि उनका बच्चा कुशलतापूर्वक टैबलेट का प्रयोग पढ़ाई के लिए करता है।