टेक्नालाजी के प्रयोग में सबसे आगे जी-3 स्कूल
-जिले में सबसे पहले स्कूल की कक्षाओं में शुरू हुआ टैबलेट का प्रयोग
-स्मार्ट क्लास में हो रहा स्मार्ट तरीके से कार्य
सोनीपत ,
ज्ञान गंगा ग्लोबल स्कूल (जी-3) ने स्कूली शिक्षा में टेक्नालाजी का प्रयोग नए तरीके से करके दिल्ली-एनसीआर में एक नया मुकाम हासिल किया है। जिले में पहली बार जी-3 स्कूल की कक्षाओं में ही व्यापक रूप से टैबलेट का प्रयोग शुरू किया गया है। वाई-फाई व सीसीटीवी लगे स्कूल कैंपस में स्मार्ट क्लासों का प्रयोग भी टीचर स्मार्ट तरीके से कर रही है, ताकि बच्चों को इसका भरपूर फायदा मिल सके। अभिभावकों ने भी स्कूल के इस कदम की सराहना की है। यही कारण है कि आज जिले में यह स्कूल बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों के बीच काफी लोकप्रिय रूप में सामने आया है। नए अभिभावक भी बच्चों का दाखिला इस स्कूल में करवाने के लिए काफी उत्सुक हैं।
टेक्नालाजी का प्रयोग आज समय की मांग
सूचना क्रांति के इस दौर में स्कूली स्तर से ही टेक्नालाजी का प्रयोग एक अनिवार्यता बन चुकी है। जी-3 स्कूल के मैनेजमेंट ने इस बात को बखूबी समझा है। इसी का परिणाम है कि जिले में पहली बार कक्षाओं में टैबलेट का प्रयोग इसी स्कूल में शुरू हुआ है। आज इस स्कूल की टीचर व बच्चे पूरी कुशलता के साथ अपनी कक्षाओं में टैबलेट का प्रयोग कर लाभान्वित हो रहे हैं।
टैबलेट से तेजी से बढ़ रही बच्चों की जानकारी
स्कूल की कक्षाओं में टैबलेट के प्रयोग के कारण बच्चों की जानकारी में तेजी से इजाफा हो रहा है। बच्चे मैथ व साइंस जैसे विषय को इसके कारण आसानी से समझ रहे हैं। विभिन्न विषयों के विजुअल्स को देखकर बच्चे विषयवस्तु को आसानी से समझ रहे हैं। टैबलेट के प्रयोग की वजह से उन्हें किताबों के भारी-भरकम बोझ से भी उन्हें राहत मिली है। शायद यही कारण हैं अभिभावकों ने भी बच्चों के लिए टैबलेट खरीदने में काफी उत्साह दिखाया है। टैबलेट के सुरक्षित प्रयोग को लेकर शिक्षकों ने भी अभिभावकों को काफी जागरूक किया है।
स्मार्ट क्लासों का हो रहा स्मार्ट तरीके से प्रयोग
आजकल स्कूलों के प्रचार-प्रसार के लिए स्मार्ट क्लासों का काफी प्रयोग हो रहा है। लेकिन जी-3 स्कूल दिल्ली-एनसीआर के उन चुनिंदा स्कूलों में शुमार है, जहां स्मार्ट क्लासों का स्मार्ट तरीके से प्रयोग हो रहा है। स्कूल के निदेशक अंकित जैन कहते हैं कि मैनेजमेंट के पास आन रिकार्ड इस बात का पूरा लेखा जोखा उपलब्ध होता है कि अमुक टीचर ने सप्ताह में कितने घंटे स्मार्ट क्लास का प्रयोग टीचिंग के दौरान किया है।
टीचरों को दी जाती है स्मार्ट ट्रेनिंग
स्कूल में शत प्रतिशत टीचर कंप्यूटर का प्रयोग करने में सक्षम है। टीचरों की नियुक्ति के बाद उन्हें मैनेजमेंट में मौजूद आईटी विशेषज्ञ एक खास शेड्यूल के तहत उन्हेंं स्मार्ट क्लास व टैबलेट का प्रयोग करने संबंधी ट्रेनिंग देते हैं। जिससे टीचर आसानी से बच्चों को पढ़ाने में सक्षम हो जाते हैं। इतना ही नहीं टीचर ई-मेल के माध्यम से भी बच्चों के अभिभावकों से संपर्क में बने रहते हैं।
क्या कहते हैं स्कूल के सीइओ
जी-3 स्कूल के सीइओ व आईटी विशेषज्ञ संजय जैन मानते हैं कि स्कूली शिक्षा में
टेक्नालाजी का सफल प्रयोग आसान नहीं था। लेकिन टीचरों की कड़ी मेहनत व अभिभावकों की जागरूकता से उनका मनोबल भी बढ़ा है। टैबलेट के प्रयोग को लेकर अभिभावक काफी असमंजस में थे। लेकिन मैनेजमेंट की सकारात्मक सोच व भावनाओं पर भरोसा जता कर अभिभावकों ने उनका काम आसान कर दिया। आज अभिभावक इस बात को लेकर खुशी का इजहार करते हें कि उनका बच्चा कुशलतापूर्वक टैबलेट का प्रयोग पढ़ाई के लिए करता है।
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